देहरादून।भाजपा की सेंट्रल लीडरशिप के हस्तक्षेप से आज पूर्व सीएम त्रिवेंद्र समेत बड़े नेताओं का गदरपुर जाना स्थगित तो हो गया, लेकिन इस “शांति” का कोई समय निश्चित नहीं है, उत्तराखंड में भाजपा संगठन और सरकार के खिलाफ दिग्गजों ने एक समानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी है, जो लगातार सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है, वरना ऐसे ही अरविंद पांडेय के पास जाने का कार्यक्रम जारी न हुआ होता, वो भी तब जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तराखंड में हो। दर्जन भर से ज़्यादा विधायकों के कूच की भी तैयारी थी, पार्टी के जिस विधायक ने मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ खुली जंग छेड़ रखी हो, पार्टी के बड़े नेताओं का “एलान-ए-जंग” अंदाज़ में उसे समर्थन कोई सामान्य घटना नहीं है।
जैसे जैसे विस चुनाव नजदीक आ रहे है वैसे वैसे उत्तराखंड भाजपा में कलह बढ़ती जा रही है, और अब इसका समाधान केवल दिल्ली के पास है। क्योंकि सरकार और संगठन के प्रदेश नेतृत्व के हाथ से बात कब की निकल चुकी है। इसी रार के चलते पिछले कई सालों से भाजपा कोर कमेटी की बैठक नहीं हो सकी, तीन महीने में होने वाली संगठन की समन्वय बैठक भी टल गई, ये वही समन्वय बैठक है जहां से से एक मिनट के भीतर ही पूर्व सीएम त्रिवेंद्र बाहर आ गए थे और बलूनी गए ही नहीं थे।


