उत्तराखंड की राजनीति में इस वक्त एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है, जिससे प्रदेश के सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस में शामिल होने से पहले ठुकराल ने पार्टी के वरिष्ठ नेता तिलकराज बेहड़ से मुलाकात की। इसके साथ ही उन्होंने प्रीतम सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। इसे उनकी नई राजनीतिक पारी की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो विधानसभा चुनाव से पहले यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। खासतौर पर भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने की रणनीति के तहत कांग्रेस ने यह बड़ा दांव खेला है।
ठुकराल के साथ-साथ नारायण पाल भी अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, जिससे पार्टी को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लेकिन इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के अंदर से ही विरोध की आवाज भी उठने लगी है।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मीना शर्मा ने ठुकराल की एंट्री से नाराज होकर अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
मीना शर्मा ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस फैसले की कोई जानकारी नहीं दी गई और पार्टी के बड़े नेताओं ने उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा। उन्होंने उत्तराखंड के शीर्ष नेतृत्व पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए गहरी नाराजगी जाहिर की है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या ठुकराल की एंट्री कांग्रेस को मजबूती देगी, या फिर अंदरूनी कलह पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगी।
फिलहाल इतना तय है कि इस राजनीतिक बदलाव ने उत्तराखंड की सियासत में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले चुनाव में इसका असर जरूर देखने को मिलेगा।
📌 अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह सियासी समीकरण चुनावी मैदान में किस तरह रंग दिखाते हैं।


