उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान अपने संबोधन में कहा कि उन्हें “मदरसा” शब्द से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जो संस्थान राष्ट्रविरोधी गतिविधियों या आतंक की फैक्ट्रियां चला रहे हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के समग्र विकास, देवभूमि की संस्कृति और जनसंख्या संतुलन (डेमोग्राफी) की सुरक्षा के लिए कड़े और साहसिक फैसले लेती रहेगी। उन्होंने कहा, “मैं राष्ट्रवादी हूं, इसलिए आतंक की फैक्ट्री चलाने वाले किसी भी संस्थान को नहीं छोडूंगा। भाजपा सरकार ने साफ नीयत, स्पष्ट नीति और पारदर्शी प्रक्रिया के साथ शासन चलाने का संकल्प लिया है। आज उत्तराखंड में न तो किसी घोटालेबाज को संरक्षण मिलता है, न किसी भ्रष्टाचारी को बख्शा जाता है।”
उन्होंने कहा कि प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में राज्य के पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2000 से अब तक सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने तरीके से राज्य के विकास को गति देने का कार्य किया है।
सीएम धामी ने अपने डेढ़ घंटे के संबोधन की शुरुआत देवभूमि के देवी-देवताओं, राज्य आंदोलन के शहीदों, और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास की यात्रा में जो भी योगदान रहा है, वह सभी नेताओं और जनता के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ लोग जानबूझकर उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे मदरसा शब्द से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जहां राष्ट्र विरोधी गतिविधियां या आतंक से जुड़ी विचारधाराएं फैलती हैं, ऐसे संस्थानों से हमें आपत्ति है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान शांति, संस्कृति और सशक्त चरित्र से है। उनकी सरकार प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि कानून व्यवस्था और राष्ट्रहित से समझौता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।


